प्रोजेस्ट्रोन उपयुक्त मात्रा में लेने से प्रारंभिक गर्भपात का बचाव संभव।

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रायपुर: भारतीय सोसाइटी ऑफ असिस्टेड रेप्रोडक्शन (आई.एस.ए.आर) के छत्तीसगढ़ चैप्टर ने अध्यक्ष डॉ. ए सुरेश कुमार, महासचिव डॉ. तृप्ति नगरीया और डॉ. रत्ना अग्रवाल के संयुक्त तत्वाधान में एक कॉन्फ्रेंस आयोजित की गयी। इनफर्टिलिटी के क्षेत्र में आयी नवीनतम तकनीक के बारे में मार्गदर्शित किया गया, रोगियों की पीड़ा को कम करने और उनकी सफलता दर को बढ़ाने के लिए की तकनीक पर विचार रखे गए। इस कॉन्फ्रेंस में राज्य के 100 से अधिक आई.वी.एफ प्रैक्टिशनरों ने हिस्सा लिया। पैनल विशेषज्ञों में कोलकाता के प्रसिद्ध आई.वी.एफ विशेषज्ञ डॉ. रोहित गुटगुटिया, इंदौर के डॉ धीरज गडा, नेशनल फैकल्टी के रूप में उपस्थित थे। कोलकाता के डॉ. रोहित गुटगुटिया ने विशेषज्ञों को सम्बोधित करते हुए कहा कि :” फर्टिलिटी केयर की मांग करने वाली महिलाओं के प्रबंधन में ओव्यूलेशन, इंडक्शन और ल्यूटल चरण सबसे मुश्किल लेकिन संतोषजनक क्षेत्र है। ओव्यूलेशन के मूल फिजियोलॉजी और ल्यूटल चरण को समझना महत्वपूर्ण है, ताकि यह स्पष्ट हो जाए कि महिलाओं को मानक प्रोटोकॉल के बदले उनके अनुकूल क्या उपचार दिया जाना चाहिए। कुछ तरीके हैं, जिसमें उपचार करने वाला चिकित्सक कुछ प्रयोगशालिक परीक्षण, सोनोग्राफी, उम्र और रोगी के वजन के आधार पर ओवेरियन प्रतिक्रिया का अनुमान लगा सकता है। यह चिकित्सक को अलग-अलग महिलाओं में आवश्यक ओवुलेशन इंडक्शन की मात्रा तय करने में मदद करता है। ” ल्यूटल फेज के अद्यतनों को समझते हुए इंदौर के डॉ. धीरज गड़ा ने कहा ” ल्यूटल चरण को ओव्यूलेशन से या तो गर्भावस्था की स्थापना या मासिक धर्म की शुरुआत के दो सप्ताह बाद के बीच की अवधि के रूप में परिभाषित किया गया है। ओव्यूलेशन के बाद, प्राकृतिक चक्र के ल्यूटल चरण को कॉर्पस लिट्यूम के गठन से वर्णित किया जाता है, जिसमें प्रोजेस्टेरोन और एस्ट्रैडियोल (इ 2) सहित स्टेरॉयड हार्मोन को स्त्रावित करता है। असिस्टेड रिप्रोडक्शन तकनीक के संदर्भ में, ल्यूटल फेज सपोर्ट (एलपीएस) शब्द का उपयोग प्रत्यारोपण प्रक्रिया का समर्थन करने के उद्देश्य से दवा की प्रबंध व्यवस्था के वर्णन के लिए किया जाता है। गर्भधारण की संभावना को बढ़ाने के प्रयास में, एलपीएस के लिए विभिन्न खुराक, अवधि और प्रकार के उपचार का मूल्यांकन किया गया है। ओवेरियन प्रतिक्रिया के अनुसार उपयुक्त प्रोजेस्टेरॉन सेवन प्रारंभिक गर्भपात से बचने में मदद कर सकता है और गर्भावस्था दर और आरोपण दर में वृद्धि कर सकता है। ” डॉ. नीता कंवर, डॉ. पलक गवरी, डॉ. मनोज चेल्लानी और डॉ. रेखा रत्नानी जैसी अन्य फैकल्टीज ने भी सी.एम.ई में अपने ज्ञान और विचार साझा किए। ई.एस.ए.आर के संगठित अध्यक्ष , लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड से सम्मान प्राप्त और छत्तीसगढ़ में फर्टिलिटी केयर के अगुआ, जाने-माने डॉ. ए. सुरेश कुमार, मेडिकल डायरेक्टर, अशोक सुपर स्पेशलिटी महिला अस्पताल ने कहा, “आई.एस.ए.आर भारत के असिस्टेड रिप्रोडक्शन के क्षेत्र में लगभग 3000 विशेषज्ञों का एक पेशेवर राष्ट्रीय संगठन है, जो प्रजनन में दिक्कत आने वाले जोड़ों के इलाज का रोगविषयक अभ्यास करते हैं, एम्ब्र्योलॉजिस्ट जो आईवीएफ प्रयोगशालाओं का प्रबंधन देखते है और वैज्ञानिक जो मूलभूत रिसर्च करते है। हमारा लक्ष्य अपने सदस्यों को नवीनतम तकनीकों से अपडेट करना, जो हमारे औषधि के क्षेत्र में तेजी से हो रहे हैं, वैज्ञानिक अनुसंधान को प्रोत्साहित करना, अंतर्राष्ट्रीय संगठन के साथ मिल कर काम करना, और नैतिक क्लीनिकल प्रैक्टिस को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम में “आई.एस.ए.आर स्टेट क्विज़” का आयोजन किया गया, ताकि 40 वर्ष से कम के लिए राज्य विजेता का चयन किया जा सके। राज्य विजेता राष्ट्रीय ई.एस.ए.आर क्विज में छत्तीसगढ़ चैप्टर का प्रतिनिधित्व वार्षिक नेशनल ई.एस.ए.आर कांग्रेस में करेंगे, जो कोलकाता में 19-22 मई, 2018 के बीच आयोजित की जाएगी।

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