नियमों के खिलाफ जेल बंद है मानसिक रोगी

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भोपाल। मेंटल हेल्थ एक्ट के अनुसार मानसिक रोगियों को जेल में नहीं रखा जा सकता, लेकिन अकेले भोपाल के सेंट्रल जेल के चार हजार कैदियों में से करीब 170 से 250 कैदी मानसिक बीमारी के शिकार हैं। यही हाल मध्यप्रदेश की अन्य जेलों का भी है, लेकिन जेल प्रबंधन की तरफ से उन पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। एक अनुमान के मुताबिक प्रदेश की जेलों में बंद कुल कैदियों में से लगभग पांच फीसदी किसी न किसी मानसिक बीमारी की चपेट में हैं। मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने जेलों में बंद मानसिक रोगी कैदियों के लिए गाइडलाइन जारी की है। मेंटल हेल्थ एक्ट में भी इन मरीजों के लिए अलग से प्रावधान किए गए हैं। अमल के लिए यह गाइडलाइन करीब तीन महीने पहले राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण की ओर से जेल महानिदेशक को भेजी गई है, लेकिन इसे अभी तक पूरी तरह से लागू नहीं किया गया है। जेलों के लिए अलग से मनोचिकित्क व मनोवैज्ञानिक तैनात नहीं हैं।मनोचिकित्सक नहीं होने से कैदियों में होने वाले मानसिक रोग की शुरू में पहचान नहीं हो पाती। उनकी समय-समय पर काउंसलिंग नहीं की जाती। जेलों में साइकेट्रिस्ट नर्स व कंपाउंडर नहीं हैं। मानसिक रोगी कैदियों की हालत ज्यादा गंभीर होने पर ही अस्पताल में भर्ती कराया जाता है। एक्ट के अनुसार जेलों अलग से सभी इंतजाम नहीं हैं।
प्राधिकरण के सचिव व मनोचिकित्सक डॉ. आरएन साहू के मुताबिक, मेंटल हेल्थ एक्ट के अनुसार मानसिक रोगियों को जेल में नहीं रखा जा सकता। उन्हें अस्पताल या घर में रखना चाहिए। जेल में मनोचिकित्सक, साइकोलॉजिस्ट, साइकेट्रिक कंपाउंडर और नर्स होना जरूरी है। समाज व परिवार से अलग रहने के चलते जेलों में बंद कैदियों को मानसिक बीमारियां ज्यादा होती हैं। अकेले भोपाल के सेंट्रल जेल 170 मानसिक रोगी हैं। डॉ. साहू का कहना है कि पिछले कई साल से हफ्ते में एक दिन स्वैच्छिक तौर पर भोपाल जेल जाकर वे इन कैदियों का इलाज करते हैं। इधर जेल महानिदेशक संजय चौधरी का कहना है कि मानसिक रोगी सबसे ज्यादा सुरक्षित जेल में ही रह सकते हैं। घर वाले व अस्पताल उन्हें रखते नहीं। छोटे जिलों में यह सुविधा नहीं है, इसलिए हम उन्हें संभागीय मुख्यालय वाली जेलों में लाते हैं। उनके लिए अलग बैरक व वार्डन हैं। उनका भोजन भी वार्डन व जेल प्रहरियों के सामने होता है। भोपाल जेल में 250 मानसिक रोगी कैदी हैं। यहां हाल ही में एक साइकेट्रिस्ट व काउंसलर तैनात किया गया है। डॉ. आरएन साहू हर हफ्ते इन मरीजों को देखने आते हैं।

 

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