एफटीआईआई के अधूरे कामों को आगे बढ़ाएंगे अनुपम खेर : चौहान

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नई दिल्ली। अभिनेता अनुपम खेर फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एफटीआईआई) के नये अध्यक्ष बनाए जाने की पूर्व अध्यक्ष गजेंद्र चौहान ने सराहना की है। उनकी नियुक्ति पर पूर्व अध्यक्ष गजेंद्र चौहान ने कहा संस्थान को अच्छे अभिनेता की जगह एक अच्छे प्रशासक की जरूरत है। अनुपम खुद एक अभिनय संस्थान चलाते हैं, इस लिए उनसे उम्मीद की जा सकती है कि वह भारतीय फिल्म एंड टेलीविजन संस्थान (एफटीआईआई) को एकदम पटरी पर ले आएंगे।
गजेंद्र ने अनुपम खेर को इस नियुक्ति पर बधाई देते हुए कहा जब किसी को किसी पद पर नियुक्त किया जाता है, तो उसके पीछे बहुत सारे विकल्प होते हैं। मुझे विभिन्न विकल्पों के लिए नियुक्त किया गया था। मेरे काम को बहुत से लोगों से देखा नहीं गया। गजेंद्र चौहान ने कहा संस्थान में, एक अच्छे अभिनेता की तुलना में अच्छे व्यवस्थापक की जरूरत है। उन्होंने कहा अनुपम खेर को काफी अनुभव है। वह अपना खुद का एक्टिंग इंस्टीट्यूट चलाते हैं, इसलिए मुझे लगता है कि वह इसे अच्छी तरह संभाल पाएंगे। उन्होंने उम्मीद जताई अनुपम वे सभी काम पूरे करेंगे, जो उनका कार्यकाल खत्म होने की वजह से बीच में ही छूट गए हैं।
बता दें कि गजेंद्र चौहान को सन 2014 में संस्थान का प्रमुख नियुक्त किया गया था, लेकिन भारी विरोध के चलते वह जनवरी 2016 में प्रभार ले सके थे। गजेंद्र चौहान जाने-माने फिल्म व टेलीविजन अभिनेता हैं। उनकी नियुक्ति के बाद एफटीआईआई के छात्रों ने काफी विरोध प्रदर्शन किया था। यहां तक कि इस वजह से छात्र 139 दिनों की हड़ताल पर भी रहे थे। अपने अब तक के कार्यकाल के बारे में बात करते हुए गजेंद्र ने कहा मैंने 22 वर्षों तक सिनेमा और टेलीविजन आर्टिस्ट एसोसिएशन का कामकाज देखा है, इसीलिए मैं अपने कार्यकाल के दौरान बहुत सारे काम करने में सक्षम था। संसद में प्रस्तुत नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रपट में एक जगह उल्लेख किया गया है, ‘एफटीआईआई में सर्वश्रेष्ठ काम गजेन्द्र चौहान की अध्यक्षता में किया गया।’ यह मेरे काम का प्रमाणीकरण जैसा है। मुझे और क्या चाहिए?”
गजेंद्र चौहान को 9 जून 2015 को संस्थान का चेयरमैन बनाया गया था। उस समय उनकी नियुक्ति को राजनीतिक बता कर संस्थान के छात्रों ने काफी विरोध किया था। छात्रों ने करीब 139 दिनों तक प्रदर्शन किया था। संस्थान के अध्यक्ष का कार्यकाल तीन साल का होता है| गजेंद्र इस पद पर सिर्फ 13 महीने ही रह पाए| उन्होंने कहा 9 जून 2015 को जब मेरी नियुक्ति हुई थी तो मेरा कार्यकाल चार मार्च 2014 से गिना गया| मैंने सात जनवरी 2016 को ज्वाइन किया और तीन मार्च 2017 को मेरा कार्यकाल खत्म हो गया। इसके बाद किसी अन्य व्यक्ति की नियुक्ति नहीं होने की वजह से चौहान ही इस पद पर बने रहे। इस दौरान न किसी की नियुक्ति की गई और न ही उनके कार्यकाल में बढ़ोतरी की गई। उनका कार्यकाल नहीं बढ़ाने जाने की वजह से माना जा रहा था कि संस्थान के लिए नए अध्यक्ष की खोज की जा रही है, जो अनुपम खेर के रूप में अब जाकर पूरी हुई है।

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