गूगल ने डूडल बना देश की पहली महिला चिकित्सक को याद किया

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नई दिल्ली। सर्च इंजन गूगल ने आज डूडल के जरिए भारत की पहली महिला चिकित्सक रुखमाबाई राउत को याद किया। गूगल ने अपने डूडल में रुखमाबाई की एक तस्वीर लगाई है। एक अस्पताल की तस्वीर भी है, जिसमें मरीज और महिला डॉक्टर दिखाई दे रहे हैं। 22 नवंबर 1864 को जन्मी रुखमाबाई राउत का विवाह महज 11 साल की उम्र में ‘दादाजी भिकाजी’ (19) से हुआ था। उन्होंने अपने सुदीर्घ जीवनकाल में एक चिकित्सक के रूप में 35 सालों तक लोगों की सेवा की। साथ सामाजिक जवाबदेही निभाते हुए उन्होंने बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए लगातार काम किया।
रुखमाबाई राउत ब्रिटिश शासनकाल में निजी प्रैक्टिस करने वाली डॉक्टरों में से एक थीं। उस दौर में महिलाओं को विशेष अधिकार नहीं मिले थे। उनके पढ़ने-लिखने को भी महत्व नहीं दिया जाता था। वह महिला अधिकारों के लिए मजबूती से खड़ी हुईं। अपने अधिकारों के लिए उन्होंने अपने विवाह का विरोध करते हुए अपने पति के खिलाफ मुकदमा लड़ा था। जयंतीबाई और जनार्दन पांडुरंग की बेटी रुखमाबाई ने आठ साल की उम्र में अपने पिता को खो दिया था। इसके बाद 11 साल की उम्र में उनका विवाह कर दिया गया था। हालांकि शादी के बाद भी वह अपनी मां के साथ ही रहती थीं। सात साल बाद उनके पति ने पत्नी को अपने साथ रखने के लिए जब कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, तो रुखमाबाई ने उनके साथ रहने से मना कर दिया।
रुकमाबाई के घरवालों ने उनका साथ दिया और कोर्ट में केस लड़ा, लेकिन फैसला उनके खिलाफ आया और उन्हें अपने पति दादादी के साथ जाने का आदेश दिया गया। इसके बाद रुखमाबाई ने अपने तर्कों से, 1880 के दशक में प्रेस के माध्यम से लोगों को इस पर ध्यान देने पर विवश कर दिया। इस प्रकार रमाबाई रानडे और बेहरामजी मालाबारी सहित कई सामाज सुधारकों की जानकारी में यह मामला आया। इसके बाद रुखमाबाई ने डॉक्टर का प्रशिक्षण लिया और चिकित्सक के रूप में 35 साल अपनी सेवाएं दीं। चिकित्सक बनने के बाद भी उन्होंने अपनी सामाजिक जवाबदेही से मुंह नहीं मोड़ा। उन्होंने बाल विवाह के खिलाफ लगातार मुहिम चलाए रखी। इस विषय पर उन्होंने लगातार लेखन किया।

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