अब एमसीआइ की जगह राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग को हरी झंडी

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नई दिल्ली। मोदी सरकार ने देश में चिकित्सा शिक्षा का ज्यादा पारदर्शी और गुणवत्ता बनाने के लिए इसे समाप्त करने का फैसला किया है। भ्रष्टाचार के आरोपों के बदनाम रहे भारतीय चिकित्सा परिषद (एमसीआइ) जल्द ही बीते दिनों की बात हो जाएगी। इसकी जगह राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग लेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में इससे संबंधित विधेयक को मंजूरी मिल गई है। सरकार इसे चालू सत्र में ही संसद में पेश करने की तैयारी में है। तैयार विधेयक में एमसीआइ की जगह पर 20 सदस्यीय राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग लाने का प्रावधान है। आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों को चुनने का काम कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली समिति करेगी। इसमें 12 पदेन और पांच चयनित सदस्य होंगे। आयोग का काम देश में चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता और प्रसार को सुनिश्चित करना होगा। सूत्रों के मुताबिक विधेयक में कालेजों को एमबीबीएस और पोस्ट ग्रेजुएट सीटों को बढ़ाने के लिए अब अनुमति लेने की व्यवस्था को खत्म करने का प्रावधान है। इसकी जगह पर तय मानकों को पूरा करने वाले मेडिकल कालेजों पर भारी जुर्माने की व्यवस्था की गई है। विधेयक में आयोग के मातहत चार स्वायत्त बोर्ड का प्रावधान भी किया गया है, जो चिकित्सा शिक्षा के अलग-अलग क्षेत्रों की निगरानी करेगा। सरकार ने देशी चिकित्सा प्रणाली को विकसित करने और बढ़ावा देने वाले राष्ट्रीय आयुष मिशन को अगले तीन साल के लिए बढ़ाने का फैसला किया है। अब यह मिशन मार्च 2020 तक जारी रहेगा और इस पर कुल 2400 करोड़ रुपये खर्च किये जाएंगे। यह मिशन 2014 में तीन साल के लिए शुरू किया था। इस मिशन के तहत नए आयुष चिकित्सा केंद्र खोले जाते हैं और मौजूदा अस्पतालों में आयुष चिकित्सा सेवाओं को उपलब्ध कराया जाता है। देश में कारोबार को आसान बनाने की नीति को आगे बढ़ाते हुए सरकार ने 53 साल पुराने कानून में बदलाव का फैसला किया है। स्पेसिफिक रिलीफ एक्ट 1963 विशेष रूप से दो पार्टियों के बीच व्यापारिक करार को लेकर है। इसके तहत यदि कोई पार्टी करार का उल्लंघन करती है, जो उसे न सिर्फ इससे होने वाले घाटे की भरपाई करनी होगी, बल्कि करार करने वाली दूसरी पार्टी किसी दूसरे से समझौता कर यह काम पूरा भी करा सकती है।

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